मेगी सेहत के लिए खतरनांक
Posted on: Friday 05 June 2015  

नई दिल्ली. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने मैगी के नौ वेरियेंट्स को अनसेफ और सेहत के लिए खतरनाक पाया है। केंद्र सरकार की फूड सेफ्टी रेगुलेटर संस्‍था FSSAI ने नेस्ले से इन नौ वेरियेंट्स के प्रोडक्शन, इम्पोर्ट और बिक्री पर तुंरत रोक लगाने को कहा है। उसने इन ब्रांड्स को मार्केट से वापस लेने को भी कहा है। इससे पहले शुक्रवार को मैगी नूडल्स बनाने वाली कंपनी नेस्ले ने कहा है कि वह अपने प्रोडक्ट में अलग से एमएसजी नहीं मिलाती। भारतीय बाजारों से मैगी हटाने के बाद इसके ग्लोबल सीईओ पॉल बुल्के खुद शुक्रवार को मीडिया के सामने आए और अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि मैगी खाना पूरी तरह सेफ है।  पॉल बुल्के (ग्लोबल सीईओ, नेस्ले ) का पूरा बयान--- ‘यह मामला मीडिया में काफी आ रहा है। हमारे लिए अपने कंज्यूमर्स की सेफ्टी काफी महत्वपूर्ण है। दुर्भाग्य से इसको लेकर काफी कन्फ्यूजन पैदा किया जा रहा है। मैगी नूडल्स भारत में सेफ हैं और ये दावा मैं खुद कर रहा हूं। हम दुनियाभर में जो मानक तय करते हैं उनका पालन भारत में भी करते हैं। हम इस मसले पर लोगों की ऑनलाइन राय जानेंगे। मैगी में अलग से एमएसजी अलग से नहीं मिलाया जाता। मैं मानता हूं कि ताजा विवाद से लोगों का हमारे प्रोडक्ट में विश्वास कम हुआ है लेकिन हम पूरी तरह खरा साबित होने की कोशिश करेंगे। हम संबंधित लोगों को यकीन दिलाने की कोशिश करेंगे कि मैगी से किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। हम इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।’

मैगी के बारे में नेस्ले की ये दलीलें राज्यों के गले नहीं उतरी
जांचों में निष्कर्ष
मैगी की दलीलें
मैगी के नमूनों में सीसा 2.25 पार्ट्स पर मिलियन की तय सीमा से ज्यादा
मैगी में लेड तय मात्रा में होता है। फूड प्रोसेसिंग या नूडल्स बनाने में सीसे का इस्तेमाल नहीं होता। जिन पैकेटों में लेड ज्यादा मिला, हो सकता है वह पानी, असेंबली लाइन या बर्तनों की वजह से आया हो।
नमूनों में मोनोसोडियम ग्लूटामेट भी मिला
हम जायका बढ़ाने वाले एमएसजी (ई621) का इस्तेमाल नहीं करते। हम हाइड्रोलाइज्ड ग्राउंडनट प्रोटीन से निकलने वाले ग्लूटामेट, प्याज के पाउडर और गेहूं के आटे का इस्तेमाल करते हैं। जब इन सबकी एक साथ टेस्ट होती है तो जांच रिपोर्ट एमएसजी दिखाती है।
लेड और एमएसजी के इन खतरों ने बढ़ाईं नेस्ले की मुश्किलें
पदार्थ
नुकसान
लेड
सीएसई के मुताबिक लेड हैवी मेटल होता है। यह शरीर में घुलता नहीं, जमा होता जाता है। बच्चे, गर्भवती महिलाओं को इससे सबसे ज्यादा नुकसान। किडनी, लीवर खराब हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक सीसे के एक्सपोजर से हर साल दुनियाभर में 1.43 लाख मौतें हो रही हैं।
मोनो सोडियम ग्लूटामेट
मेंटल और फिजिकल हेल्थ के लिए खतरनाक। शुरुआती तौर पर हाइपर टेंशन और सिर दर्द की शिकायत हो सकती है।
देश में हर पांचवां सैम्पल फेल : कितने सेफ हैं फूड आइटम्स?
मैगी विवाद ने पैकेज्ड फूड की सुरक्षा पर सवाल उठा दिए हैं। राज्य सरकारों की सक्रियता के बाद पीएमओ ने भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। नेपाल, ब्रिटेन जैसे देश भी सक्रिय हुए हैं। लेकिन सुरक्षित आहार जांचने वाली देश की शीर्ष संस्था फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2014-15 की रिपोर्ट कहती है कि देश में पैकेज्ड फूड का हर पांचवां नमूना तय मानकों की तुलना में फेल हो गया।
दो साल में देशभर में 22040 सैम्पल में मिली मिलावट
FSSAI की रिपोर्ट
कितने सैम्पल
कितनों में मिलावट
कितनों पर कार्रवाई
2013-14
72 हजार
13571
3845
2014-15
49 हजार
8469
1256

क्या इसलिए बच निकलती हैं कंपनियां?
- एफएसएसएआई नियमित तौर पर इंस्पेक्शन नहीं कराती। वह राज्यों पर ज्यादा निर्भर है। - राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी है। - राज्य जिन लैब में सैम्पल भेजते हैं, उनमें से अधिकतर तय मानकों का पालन नहीं करते। सिर्फ नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज की तरफ से मान्यता प्राप्त लैब ही सही जांच कर सकते हैं। - राज्य में फूड इंस्पेक्शन के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। अधिकतर विभागों में भ्रष्टाचार के मामले भी सामने आते हैं। - फूड सेफ्टी के लिए केंद्र और राज्यों ने मिलकर 2009 में पांच साल का एक्शन प्लान बनाया था। 6 साल बाद भी यह प्लान लागू नहीं हो सका है। मैगी के कारण नेस्ले इंडिया को 10 हजार करोड़ रुपए का नुकसान स्विट्जरलैंड की बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले दुनियाभर के 130 देशों में हर साल 5.2 अरब मैगी पैकेट बेचती है। भारत में नेस्ले के रेवन्यू में मैगी की हिस्सेदारी 20% है। मैगी की बिक्री घटने के बाद नेस्ले इंडिया के शेयर्स में 15% की गिरावट आ चुकी है। 28 मई को इसके शेयर्स 7038 रुपए पर थे, जाे गुरुवार को घटकर 6010 रुपए पर आ गए। नेस्ले इंडिया का 2014-15 में प्रॉफिट 1185 करोड़ रुपए और सेल्स रेवेन्यू 9800 करोड़ रुपए था। मैगी विवाद के चलते शेयर्स में गिरावट के बाद नेस्ले इंडिया का मार्केट कैप 10 हजार करोड़ रुपए कम हो चुका है।

 
 












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