तेज़ी बन रहे न्यूक्लियर हथियार, एटमी वॉर का खतरा
Posted on: Saturday 14 January 2017  

वॉशिंगटन. अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जो बिडेन कहा है कि कुछ देश जिस तरह न्यूक्लियर हथियार बना रहे हैं उससे एटमी वॉर का खतरा पैदा हो गया है। पाकिस्तान, रूस औऱ नॉर्थ कोरिया अपनी सुरक्षा के लिए बड़ी तेज़ी के साथ ये हथियार बना रहे हैं। साथ ही इससे यूरोप, साउथ एशिया या फिर ईस्ट एशिया में आपस में जंग हो सकती है। अगले अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन के सामने इन खतरों से निपटने  की चुनौती है।


बिडेन ने कहा, "आने वाले एडमिनिस्ट्रेशन के सामने कई खतरे होंगे। उन्हें दुनिया से न्यूक्लियर हथियार खत्म करने की दिशा में काफी काम करना होगा।" उन्होंने ये भी कहा, "महज एक एटम बम ही दुनिया में काफी नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह थी कि जब मैंने और ओबामा ने 8 साल पहले कार्यभार संभाला  था, तब न्यूक्लियर खतरे को दूर करने को प्रायोरिटी में शामिल किया था।" "हम जानते हैं कि आतंकी न्यूक्लियर मटेरियल को हथियारों में बदलने चाहते हैं और वे ऐसा कर भी सकते हैं। कोई भी देश अकेला इस खतरे का सामना नहीं कर  सकता।" बता दें कि एक हफ्ते बाद ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन का कार्यकाल खत्म हो रहा है।


`हमारे पास रेडियोएक्टिव मटेरियल पता लगाने की टेक्नीक` बिडेन ने कहा, "खुफिया तरीके से रेडियोएक्टिव मटेरियल की स्मगलिंग होती है। अब हमारे पास ऐसी भी टेक्नीक है, जिससे न्यूक्लियर मटेरियल का पता लगाकर उसे सीज किया जा सकता है।" "नॉर्थ कोरिया अपने मिसाइल प्रोग्राम को लगातार बढ़ा रहा है। इससे केवल इंटरनेशनल सिक्युरिटी ही नहीं, उसके खुद के डिफेंस को भी खतरा है।"  "कुछ ऐसे देश जिनके पास न्यूक्लियर हथियार है, संभावना है कि उनके पास ये वेपन्स आतंकियों के हाथ लग जाएं। इससे खतरा और बढ़ सकता है।" बिडेन कहते हैं, "इंटरनेशनल कम्युनिटी को धता बताकर नॉर्थ कोरिया न्यूक्लियर नॉर्म्स का लगातार वॉयलेशन कर रहा है। पिछले साल उसने अवैध तरीके से 2  न्यूक्लियर टेस्ट किए।"


"नॉर्थ कोरिया पर सैंक्शन्स और कड़े किए जाने चाहिए। उसे ये समझना होगा कि न्यूक्लियर प्रोग्राम के चलते दुनिया पर खतरा बढ़ेगा।" `नॉर्थ कोरिया को रोकना एक चैलेंज`  बिडेन के मुताबिक, "नॉर्थ कोरिया जिस तरह से अपनी ताकत बढ़ा रहा है, उस लिहाज से यूएस की अगली सरकार के लिए वह चुनौती साबित होगा।" "हालांकि, उसे रोकना आसान नहीं होगा। इसके लिए हमें अपने एशियाई दोस्तों की मदद लेनी होगी। नॉर्थ कोरिया को कड़ा मैसेज देना होगा कि उसका कोई धमकी कारगर साबित नहीं होगी।" "अब ये नॉर्थ कोरियाई लीडर्स को तय करना है कि वे अलग-थलग पड़े रहना चाहते हैं या फिर अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मानते हैं।"

 
 












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