(अनवर चौहान)  नई दिल्ली. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बुधवार को होने वाली इफ्तार पार्टी में पीएम नरेंद्र मोदी शामिल नहीं होंगे। ये पहला मौक़ा नहीं दूसरी बार हो रहा है। दरअसल मंगलवार को हिदू-महासभा ने मोहन भावत को सोमवार को ही धमकाया है। उसने  पत्र लिखकर साफ कहा कि यदि RSS के नेता यदि इफ्तार पार्टियों में शामिल हुए तो वा हमारे उन दफ्तर को खाली कर दे जिन ज़मीनों पर RSS के दफ्तर चल रहे हैं। हिंदू महासभा RSS को खुले तौर पर लताड़ा है कि आरएसएस के नेता बाज़ नहीं आए तो सख्त क़दम उठाया जाएगा। यों तो बहाने हज़ार हैं लेकिन मोदी को समझ में आ गया है कि यदि हिंदू कट्टरवादी छवि को यदि बरक़रार रखना है तो इफ्तार पार्टियों से गुरेज़ रखना पड़ेगा। लिहाज़ा मोदी ने राष्ट्रपति की इफ्तार पार्टी में शरीक न होने के लिए कुछ इस तरह का उज़र निकाला है... पीएम कल नॉर्थ ईस्ट के राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति की इफ्तार पार्टी में पीएम के शामिल होने का फिलहाल कोई कार्यक्रम नहीं है। अगर ऐसा होता है तो यह लगातार दूसरा मौका होगा जब मोदी राष्ट्रपति की इफ्तार पार्टी में शामिल नहीं होंगे। पिछले राष्ट्रपति की इफ्तार पार्टी के मौके पर भी प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट के ज्यादातर मंत्री इस आयोजन में नहीं पहुंचे थे। हालांकि तब गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार की तरफ से इस पार्टी में शिरकत की थी, जिस पर मोदी के आलोचकों ने कहा था प्रधानमंत्री देश की सेक्युलर छवि को नजरअंदाज करते हैं। जबकि पीएमओ की तरफ से प्रधानमंत्री के एक ऑफिशियल विजिट पर मुंबई दौरे पर होने की बात कही गई थी।


ये तस्वीर है अटल विहारी वाजपयी की इफ्तार पार्टी की, मोदी अब तोड़ना चाहते हैं इस रिवायत को