उजड़े चमन को संवारने की क़वायद शुरू
Posted on: Thursday 04 June 2015  

फरीदाबाद। आग से खाक हो चुके घर और जगह-जगह फैला टूटा सामाना। ऐसा ही कुछ नजारा है अटाली गांव का, जहां अल्पसंख्यक परिवारों का घरों को लौटना अब शुरू हो गया है। इन लोगों ने इंसान और इंसानियत दोनों को ही दम तोड़ते बेहद करीब से देखा है। घर वापसी के बावजूद इनके चेहरों पर दहशत का साया अब भी बरकरार है। हिंसा के बाद जान बचाने के लिए अब तक यह बल्लबगढ़ के थाने में डेरा डाले हुए थे। अब भी पुलिस के साए में यह लोग घर वापसी कर रहे हैं। पुलिस ने इन्हें सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाया है। इसके चलते गांव में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। जगह जगह रेपिड एक्शन फोर्स तैनात है। --कोर्ट पहुंचा मामला--इस मामले में एक पीडि़त ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसको कोर्ट ने खारिज करते हुए उन्हें पहले हाईकोर्ट जाने का आदेश दिया है।--वीआईपी लोगों के आने से टूटी गांव की खामोशी---यहां हुई हिंसा के बाद इस गांव में कई बार वीआईपी लोगों का दौरा हुआ है। आल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुसलमीन के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी से लेकर सीपीएम और भाजपा के नेताओं की गाडि़यों ने कई बार यहां की डरावनी खामोशी को तोड़ा है। ओवैसी से पहले विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगडि़या इस गांव में पहुंचे थे। इसके बाद ओवैसी और फिर साध्वी प्राची भी इस गांव में आई थीं। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने विधायकों टेकचंद और मूलचंद शर्मा ने भी हिंसा की चपेट में आए इस गांव का दौरा किया और दोनों पक्षों के लोगों से मुलाकात की थी। पीड़ित पक्ष के आंसू पोछने बुधवार को हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के चैयरमैन खुर्शीद अहमद, हरियाणा के पूर्व मंत्री अफताब अहमद और अब्दुल कुरैशी, सतबीर डागर समेत कई नेता बल्लभगढ़ थाने पहुंचे। अखिल भारतीय किसान महासभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और हरियाणा सीपीआइ (एमएल) के प्रभारी प्रेम सिंह गहलावत ने भी लोगों की दास्तान सुनी। इन सभी नेताओं ने मौजूदा मनोहर लाल खट्टर सरकार की कार्यप्रणाली पर उंगुली उठाते हुए प्रशासनिक तौर पर सरकार को पूरी तरह से नाकाम बताया।----प्रशासन ने दिया मुआवजा का भरोसा---प्रशासन ने पीड़ित पक्ष के लोगों को सुरक्षा व उचित मुआवजा देने का भरोसा दिया। पीड़ित पक्ष की सुरक्षा के लिए गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पीड़ित पक्ष के लोग विगत 25 मई से बल्लभगढ़ शहर थाने में शरण लिए हुए थे। पुलिस आयुक्त सुभाष यादव ने बताया कि पुलिस थाने में शरण लिए सभी लोग गांव लौट गए हैं। ---फिर से बसने की कवायद---जिन लोगों ने उस मंजर को अपनी आंखों से देखा है उनके लिए यहां पर दोबारा बसने की कवायद करना कम जद्दोजहद भरा नहीं है। उनके सामने अपने टूटे घरों को दोबारा बनाने और फिर से सभी सामान को जुटाना भी एक बड़ी चुनौती है। अपने ही लोगों का भराेसा खोए यह लोग अब अपना बचा हुआ सामान समेट कर दोबारा बसने की कोशिश कर रहे हैं। फरीदाबाद के डीएम ने जब इन लोगों से बात की तो सभी का सवाल लगभग एक जैसा ही था कि वह अपनी शुरुअात अब कैसे करें, जबकि सब कुछ तबाह हो चुका है। हिंसा के दौरान यहां हुई लूटपाट में इन लोगों के पालतू जानवरों का भी अब कुछ पता नहीं है।---अब भी कायम है विवाद----जिस वजह से यहां पर हिंसा का नंगा नाच खेला गया वह विवाद अब भी कायम है। गांववालों के मुताबिक अल्पसंख्यक समुदाय का धार्मिक स्थल वहां नहीं बन सकता है जहां वह चाहते हैं। उनका कहना है कि वहां केवल मंदिर ही बनेगा और यदि उन्हें अपना धार्मिक स्थल बनवाना है तो इसके लिए उन्हें गांववालों से सलाह लेनी होगी। इसके बाद ही कुछ आगे करना होगा। इसकी वजह उनका बक्या था विवाद 26 मई को करीब 2,000 सशस्त्र व्यक्तियों ने अटाली गांव के कई मुस्लिम परिवारों के घरों और दुकानों को आग लगा दी । एक घंटे तक चली खुलेआम लूटपाट में कई मुस्लिम परिवारों का सब कुछ जलकर ख़ाक हो गया। 15 से भी अधिक लोग बुरी तरह घायल हुए। गांव के करीब 150 मुस्लिम परिवार बेघर होकर पुलिस थाने में शरण लेने को मजबूर हो गए

 
 












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