आचार्य श्रीहरि 

हिंदुत्व सुखमय, शांतिमय जीवन का प्रतीक है, वसुधैव कुटुम्बकम् यानी विश्वबन्धुत्व इसकी स्वीकृति और विशेषता है, ॐ शांति का संदेश इसे अन्यों से अलग प्रदर्शित करता है। हिंसा और विखंडन से परे भी है। उपर्युक्त हिंदुत्व की विशेषताओं को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने भी माना है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में हिंदू फोबिया  के खिलाफ बहुत बड़ी जीत हुई है, हिंदुत्व के खिलाफ घृणा और हिंसा की मानसिकता, जिहाद और राजनीति की आलोचना की गई है, हिंदू वंशियों को एक धरोहर जैसी लोकायुक्ति मिली है, प्रस्तावना मिली है और प्रोत्साहन मिला है। साफतौर पर कहा गया है कि हिंदुओं के विकास और उन्नति से डरने की बात नहीं है, इसके खिलाफ घृणा फैलाने की बात नहीं है, इसके खिलाफ अभियान चलाने की बात नहीं है, इसके खिलाफ यूनियन बाजी करने की बात नहीं है, इसके खिलाफ हिंसा फैलाने की भी बात नहीं है। हिंदुत्व के खिलाफ जारी घटनाएं अस्वीकार है और मानवता के खिलाफ है, हिंदुत्व पर हमले अज्ञानता का प्रतीक है, हिंदुत्व के विश्वबन्धुत्व विश्वास के खिलाफ है।  हिंदुत्व ही है जो विश्व बन्धुत्व की तार्किक बात करता है और इस पर ईमानदारी से प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित करता है। ये अस्मिता भंजक भी नहीं होते हैं, ये संप्रभुता भंजक भी नहीं होते हैं, ये जिहादी भी नहीं होते हैं, ये आतंकी भी नहीं होते हैं। इनकीविश्वसनीयता भी संदिग्ध नहीं होती है। इनकी मौन उपलब्धियां संबंधित राष्ट्र का गौरव को समृद्ध करने का काम करती है। चिंता भी प्रकट की गई है कि जिस तरह से हिंदुत्व और मंदिरों को दुनिया भर में निशाना बनाया जा रहा है उस तरह से प्रतिकार करने के लिए नियामक सक्रिय नहीं है, विरोध की वैश्विक आवाज भी खामोश है।
          हिंदू फोबिया के खिलाफ यह जीत कहा मिली हुई है? क्या इस जीत से हिंदुत्व की अस्मिता, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा होगी? क्या इस जीत की आवाज उन हिंसक, उन्मादी और आतंकी देशों तक जाएगी ? क्या मलेशिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव आदि देशों में अस्तित्व संहार की लड़ाई लड़ रहे हिंदुओं को ऑक्सीज़न मिलेगा, न्याय मिलेगा? संरक्षण मिलेगा? अमेरिका और यूरोप में हिंदुत्व के खिलाफ  जिहादी साजिश और उत्पीड़न से छुटकारा मिलेगा? अपनी जन्म स्थली भारत में हिंदुओं के अपमान और घृणा की राजनीति से मुक्त होगा?  क्या यह सही नहीं है कि भारत में भी हिंदुत्व खतरे में है, मुस्लिम हिंसा, मुस्लिम जिहाद, मुस्लिम आतंक का घिनौना और हिंसक शिकार है, कई राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए पर उन्हें अल्पसंख्यक का अधिकार नहीं मिलता है, गोधरा कांड , हिंदुत्व के महान प्रहरी कमलेश तिवारी को सरेआम जबह कर दिया जाता है, सूर्या चौहान को सरेआम कुर्बानी दे दी जाती है पर राजनीति खामोश ही रहती है, कोई हलचल उत्पन्न नहीं करती है, इन मुस्लिम हिंसाओं के खिलाफ कोई सबककारी राजनीतिक प्रकिया भी नहीं चलती है।
          हिंदू फोबिया के खिलाफ यह जीत अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में मिली है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में  भारत वंशी सांसद रो खन्ना ने उस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया जिस प्रस्ताव में अमेरिका की संप्रभुता सरक्षण, विकास और अर्थव्यवस्था की समृद्धि में हिंदुओं के महान योगदान की सराहना की गई है और हिंदुओं के प्रति होने वाली नस्ली हिंसा, जिहादी अभियान की निंदा की गई है। यह प्रस्ताव मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद श्री थानेदार ने जनवरी महीने में रखा था और अब तक 32 सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। खन्ना ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा है कि प्रतिनिधि सभा में इस प्रस्ताव का समर्थन करने पर मुझे गर्व है। यह प्रस्ताव अमेरिका में हिंदू समुदाय के निरंतर योगदान और उसकी जीवंत विविधता का समर्थन करता है, प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि हिंदू दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म है, इसकी विश्वबन्धुत्व और अतिथि देवो भव की भावना दुनिया की धरोहर है और दुनियां की सुखमय, सह अस्तित्व को शक्ति प्रदान करती है। दुनियां के 100 से भी अधिक देशों में हिंदुओं का प्रेरणादायक अस्तित्व है, इनकी जनसंख्या 1.2 अरब है। प्रतिनिधि सभा में इस प्रस्ताव की अमेरिका में बहुत चर्चा है, मीडिया में इसकी गूंज है, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि अमेरिका की राजनीति में भी  इसकी गूंज है, इस पर श्रेय लूटने जैसी प्रतिस्पर्धा चल रही है। प्रस्ताव तो डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर आया था पर रिपब्लिक पार्टी भी श्रेय लेने से पीछे नहीं है, रिपब्लिक पार्टी के सांसद श्री इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। प्रस्ताव पर चर्चा और समर्थन से अमेरिकियों  की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं और वे भी हिंदुओं के निरंतर योगदान और समर्पण की सराहना करने लगे हैं। पर कुछ जिहादी और कट्टरपंथी समुदाय के लोगों को यह पसंद नहीं है कि हिंदुओं का गुणगान किया जाए या फिर उन्हें उनके योगदान के प्रति सहानुभूति प्रकट किया जाए या फिर उनके  प्रति नतमस्तक होना चाहिए।
      हिंदू विहीन अमेरिका की कल्पना तक नहीं हो सकती है, अमेरिका में हिंदुत्व रच बस गया है।  अमेरिका के सम्पूर्ण विकास में हिंदुत्व का योगदान और भूमिका महान है, सर्वोपरि है। खासकर विज्ञान और प्रद्यौगिकी क्षेत्र में हिंदुत्व की भूमिका अग्रणीय ही नहीं बल्कि प्रेरणादाई है। कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स को कौन नहीं जानता है? नासा के कार्यक्रम को गति देने वाले भी हिंदुत्व से निकले हुए वैज्ञानिक है, जिनकी आस्था और मान्यता सनातन विज्ञान से जुड़ा हुआ है। सनातन एक विज्ञान है, सनातन ने जो हजारों साल पहले सिद्ध कर दिया, वहां तक भी आज का विज्ञान पहुंचा नहीं है। याद कीजिए रामायण काल का पुष्पक विमान जो मन की इच्छा के अनुसार उड़ता था, बैठता था और विस्तार देता था। क्या दुनियां ने पुष्पक विमान की तरह कोई विमान बना पाया?  अमेरिका का उद्योग जगत जो फैल रहा है, कामयाबी की  माचन छू रहा है, यह किसकी कामयाबी, इसका श्रेय किसका है, यह किसके कौशल का सुखद परिणाम है? निश्चित रूप से हिंदुत्व की ही भूमिका है। क्योंकि अमेरिका में जितने बड़े उद्योग और कारपोरेट संस्थान है, सबके खेवनहार हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रोफेशनल हैं। अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी हिंदुत्व की समृद्धि के कारण गतिमान है। सबसे बड़ी बात यह है कि राष्ट्रपति बनने के लिए भी अब हिंदुत्व का समर्थन चाहिए, अमेरिका की दोनों  मुख्य पार्टियों की मजबूरी भी सामने आती है और दोनों मुख्य पार्टियों के बीच हिंदुत्व का समर्थन प्राप्त करने का प्रतिस्पर्धा रहता है। डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुनावो में कमला हैरिस ने चुनौती देकर इतिहास रच दिया था और यह साबित कर दिया था कि हिंदुत्व अब अमेरिकी संप्रभुत्ता का नेतृत्व करने का साहस रखता है। 
          सबसे बड़ी बात यह है कि हिंदुत्व अमेरिका के लिए कोई खतरा नहीं है, कोई खलनायक नहीं है, कोई संप्रभुता भंजक नहीं है। अपने लिये अलग देश की मांग नहीं करता है, आतंक और जिहाद के रास्ते पर नहीं चलता है, विखंडन कारी नहीं होता है। ईसायत और मुस्लिम के बीच खाई चौड़ी हो रही है, मुस्लिम करण के खतरे बढ़े हुए हैं, मुस्लिम हिंसक गोलबंदी से अमेरिका की संप्रभुता को खतरा है। अमेरिका विरोधी मुस्लिम आबादी सरेआम गोलबंदी दिखाती हैं। यही कारण है कि ट्रंप को कभी यह कहने के लिए बाध्य होना पड़ा था कि अमेरिका विरोधी मुस्लिम आबादी को बाहर खदेड़ा जाएगा। बहुत कड़ाई के बाद भी अमेरिका इसराइल विरोधी मुस्लिम आबादी की हिंसक और विखंडनकारी गतिविधियों जारी रहती हैं। हिंदुत्व आबादी हमेशा से ईसाई संप्रभुत्ता को स्वीकार करती है और उसके साथ सहचर रहती है।
         हिंदुत्व की विशेषता भी गौरवशाली है, प्रेरणादायक है। हिंदू जिस मिट्टी में रहते हैं उसी मिटी को अपनी संप्रभुता मान लेते हैं, अपनी माता मान लेते हैं, अपने विकास और समृद्धि का प्रतीक मान लेते हैं। यही कारण है कि अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप में हिंदुत्व की समृद्धि सिर चढ़कर बोलती है। ऋषि सुनक ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बन कर ब्रिटेन के गौरव और समृद्धि को ही बल प्रदान करते हैं। यह अच्छी बात है कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने हिंदुत्व की समृद्धि और विरासत को स्वीकार किया है और हिंदुत्व की सुरक्षा के प्रति सहानुभूति प्रकट किया है। दुनियां के अन्य नियामक भी अब हिंदुत्व के प्रति सुरक्षा और सहानुभूति प्रकट करें ।